अम्बेडकर अनुयायी लड़कियाँ

सभी लोगों विशेषकर अम्बेडकरवादी विचारधारा और उनमें भी लडकियों/महिलाओं का इस ग्रुप में स्वागत है |

हमारी पूज्य मूलनिवासी बहुजन वीरांगनाएं------- अपने संघर्ष और साहस के बल पर इतिहास में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित कराने वाली इन अमर वीरांगनाएं के चरणों में शत शत नमन।
झलकारी बाई
ऊदादेवी पासी
महावीरी भंगिन
रमाबाई आंबेडकर
सावित्री बाई फुले
सुश्री मायावती
फूलन देवी
"सहीद कमलेश कुमारी''

मैं एक बाबा साहब की बेटी हूं
बाबा साहब की शक्ति
और बुद्ध की भक्ति
अपने अंदर समेटी हूं
ये कसम है मेरी
अपने बच्चों को अंधविश्वास में न पड़ने दूंगी,
ढोंगियों पाखण्डियों की अब
एक न चलने दूंगी
ये ढोंग रचा है ब् ने,
कह कर अपने समाज को और न लुटने दूंगी,
चल पड़ा है समाज मेरा 'जय भीम' का नारा लेकर
और अपना लिया है पंचशील का मार्ग,
पूरा होगा अपना सपना
बौद्धमय भारत होगा अपना
जय भीम जय भारत नमो बुद्धाय !

सभी लड़कियों को डा. अम्बेडकर के मिशन के लिए आगे आना चाहिएऔर पूरा करने के लिए मदद करनी चाहिए.'हिन्दूकोड बिल' जिसका मुख्य आधार ही भारतीय नारी को कानूनी न्याय दिलाते हुए उन्हें उनके कानूनी अधिकार दिलाना था। तलाक का अधिकार, पुनर्विवाह और महिलाओं के लिए संपत्ति में अधिकार or obc reservation के वह पक्षधर थे इस हिन्दू कोड बिल को और डॉ० अम्बेडकर, दोनों को कट्टरपंथियों का भयंकर विरोध सहना पड़ा। हिन्दू कोड बिल के विरोध में डॉ० अम्बेडकर को कई बार व्यक्तिगत अपमान झेलना पड़ा। उनके घर पर भी पत्थर बरसाये गये और संसद में भी उनका बहिष्कार किया गया। हिन्दू कोड बिल पास कराने के लिए डॉ० अम्बेडकर के साथ-साथ अनेक दलित महिलाओं ने भारतीय महिलाओं की सामाजिक व आर्थिक लड़ाई लड़ी है। किन्तु अफसोस की बात है कि हिन्दू कोड बिल पर चलाया जाने वाला आन्दोलन भी तथाकथित नारीवादियों के द्वारा उपेक्षित कर दिया गया। एक महिला जो पुरानी रूढ़िवाद की पोषक थी, उन्होंने कहा कि हमारा आदर्श सीता, सावित्री और द्रौपदी है। हम सवर्ण नारियों को तलाक जैसी निन्दनीय पद्धति पर चलता नहीं देखना चाहते। दुर्गाबाई ने उनकी खूब खबर ली और कहा कि द्रौपदी के एक समय में ही पाँच पति थे। क्या हम हिन्दू नारियों का भी यही आदर्श होना चाहिए? दुर्गाबाई देशमुख का मानना था कि भारत की स्वाधीनता केवल
पुरुषों के लिए ही प्राप्त नहीं की गई है, बल्कि इसमें नारी जाति के कल्याण का महान उद्देश्य और उनके कल्याण का ध्येय भी शामिल है। दुर्गाबाई देशमुख मीटिंग में ऐसे अकाट्य तर्क रखतीं जिससे कट्टरवादियों के मुंह बंद हो जाते थे तथा सारी गोष्ठी पर उनकी धाक छा जाती थी। अक्सर डॉ० अम्बेडकर और महिला साथियों द्वारा आयोजित हिन्दू कोड बिल चर्चा सभाओं में कट्टर पंथियों द्वारा सीधा हमला कर दिया जाता था और चर्चा सभाओं को जबरदस्ती बंद करा दिया जाता था। उस समय के अखबार भी हिन्दू कोड बिल के खिलाफ अनेक भड़काउ लेख छाप रहे थे उस समय देश का माहौल डॉ० अम्बेडकर और उनकी महिला साथियों के खिलाफ विषाक्त हो गया था। आखिर में जब हिन्दू कोड बिल संसद में पास न हो सका तब डॉ० अम्बेडकर ने विरोध स्वरूप संसद से त्यागपत्र दे दिया। हिन्दू कोड बिल पर डॉ० अम्बेडकर का मानना था कि वे हिन्दू कोड बिल पास कराकर भारत की समस्त नारी जाति का कल्याण करना चाहते थे। ।

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