Canara Bank newly Recruited clerks frm 24/06/2013

लोग ही लोग हैं चारों ओर
बैंक के अंदर , बैंक के बाहर ,
दिन रात दौड़ते लोगों के पास ,
वक़्त नहीं है अपने अपने काम से.
सारे पैसे बैंक में डाल के ,
हम ग्राहक बार बार बैंक दौड़ते हैं ...
कहीं पैसे भेजने , गहने रखने , गैस की सब्सिडी कराने , बच्चे की फीस जमा कराने ,
सैलरी लाने , मजदूरी लाने , बिजली का बिल भरने , रोज़ के खर्चे निकालने , रोज़ की बचत जमा कराने ,
बीमा कराने , मरे हुए रिश्तेदारों के पैसे निकालने , सरकारी योजनाओं के फायदे उठाने ,
अपने पुरे परिवार का भविष्य सुरक्षित कराने ,
और जाने क्या क्या कराने जो हम भी नहीं जानते
हर काम करने के लिए हमे बैंक जाना ही पड़ता हैं ..
कितने लोग.... सौ , हज़ार , लाख , करोड़
और कितने काम....सौ , हज़ार , लाख , करोड़, हर रोज़ .
और बैंकर कितने... एक दो या तीन ....
सबको जल्दी काम करा के जाना हैं ..
किसी को बस पकड़ना हैं
किसी को हॉस्पिटल जाना हैं
किसी के भाई की मरखी हैं
किसी के पिता बीमार हैं .
किसी की माँ बूढी हैं ,
किसी का बच्चा रो रहा हैं ,
किसी का बेटा दूर शहर में पढ़ने गया हैं
किसी की बेटी गुंडों से घिरी हैं
सब को अपने काम करा के जल्दी जाना हैं ..
पर हर बैंक के ब्रान्च में बैठा ,
एक दो या तीन बैंकर
जो अपने घर, माँ बाप, रिश्तेदारों से सैकड़ों हज़ारों मील दूर बैठा हैं
उसके बच्चे बीमार नहीं होते ,
उसकी बीबी पत्थर की हैं
उसकी माँ कभी बूढी नहीं होती
उसका पिता शक्तिमान हैं
उसके भाई रिश्तेदार संगी किसी को उसकी जरूरत नहीं हैं
बैंकर खाना नहीं खाता
बैंकर सब्जी नहीं खरीदता
बैंकर कपडे नहीं खरीदता
बैंकर बिल नहीं भरता ,
बैंकर के बच्चे बाप के साथ नहीं खेलते ,
बैंकर की बेटी गुंडों से सेफ हैं
बैंकर को दर्द नहीं होता
उसके कोई अरमान नहीं होते .
हाय !
बैंकर के पास भी वो सारे काम हैं वो सारे रिश्ते हैं ,वो सब कुछ हैं
पर बैंकर के पास अब उन्हें दफ़नाने का भी वक़्त नहीं ..
सारे नाम मोबाइल में हैं ,
पर उसे किसी के लिये वक़्त नहीं .
गैरों की क्या बात करें ,
जब उसे अपनों के लिये ही वक़्त नहीं .
उसकी आखों में नींद भरी हैं ,
पर उसे सोने का भी वक़्त नहीं .
उसका दिल ग़मो से भरा हुआ है ,
पर उसे रोने का भी वक़्त नहीं .
मैं जब बैंक जाता हूँ तो सोचता हूँ इन बैंकरों को देखकर ,
कि इनके पास तो थकने का भी वक़्त नहीं .
ये बेचारे पराये एहसानों की क्या कद्र करें ,
जब इन्हें अपने सपनों के लिये ही वक़्त नहीं
अरे बैंकर
तेरी इस ज़िन्दगी का क्या होगा,
कि सबके लिए हर पल मरते हो ,
और तुझे जीने के लिये भी वक़्त नहीं ..
और तेरी कोई कद्र भी नहीं ... -\-\-\-\एक ग्राहक ( बैंकर का भगवान )