Hamro Sarlahi

- इस्लाम मे अल्लाह साकार है उसका नाम कबीर हैा-\-\******* (फोटो-4) p1 मे देखे ************=============================तोरेत जबूर और इंजील और कुरानशरीफ ये मुसलमान भाईयो की 4 कतेब है जैसे हिन्दूओ के 4 वेद हैा
..तोरेत पैदाइश 1:25-2:12
आयत- 26 खुदा ने कहा हम इंसानो को अपनी सुरत के अनुसार बनाये ...
आयत- 27 तब खुदा ने इंसानो को अपनी सुरत के अपनुसार पैदा किया नर और नारी करके इसानो को बनाया... इससे साबित होता है वह अल्लाह हमारे जैसी सुरत का है मतलब साकार हैा क्योकि उसने हमे अपनी सुरत के जैसा बनाया हैा.
....-\-\-\-\-\-\-\-\-\-\ आजान -\-\-\-\-\-\-\-\-\-\-\-\-\-\-\-\
-अरबी - अल्लाह हु अकबर , अल्लाह हु अकबर
अकबर का अर्थ बडा होता है..
.कबीर का अर्थ बडा होता...
अकबर कबीर दोनो एक ही नाम है.. कबीर का बिगडा हुआ शब्द अकबर बना रखा हैा...अल्लाह हु अकबर की जगह हम अल्लाह हु कबीर भी बोल सकते हैा
क्योकि कुरान शरीफ मे सुरत फुरकान 25 आयत 59 मे लिखा है जिसने आसमान और धरती के बीच सब कुछ छह दिन मे पैदा किया वह अल्लाह कबीर हैा.. इसलिए हम अल्लाह हु कबीर बोल सकते हैा.
.अरबी - अल्लाह हु कबीर....
..गलत अर्थ - अल्लाह बडा हैा.
.सही अर्थ - अल्लाह कबीर हैा. .नोट- जैसे वेदो मे कविर का अर्थ संस्कृत विद्वानो ने सर्वज्ञ किया हैा वैसे ही मुसलमान भाईयो नेकबीर का अर्थ बडा किया हैा जो की गलत है... क्योकि यहा कविर और कबीर ये परमात्मा के नाम है नाम किसी का भी हो किसी भी भाषा मे उसका अनुवाद नही होता.. नाम ज्यो का त्यो लिखना पडता हैा.
..जैसे - Honey eats the food..
.हिन्दी - हनी खाना खाता हैा
...Honey का अर्थ शहद होता हैा अगर हम इसका अनुवाद ऐसे करते -\-\ शहद खाना खाता हैा.. तो गलत होता..यहा हनी नाम है नाम का अनुवाद नही होता..अल्लाह हु कबीर का अर्थ हम कर सकते है अल्लाह कबीर हैा..******** * (फोटो-4) p2,p3 मे देखे ******=============================कुरान शरीफ- सुरत फुरकान 25 आयत 51से 59 तक अल्लाह हु कबीर के बारे मे लिखा हैैा..अायत 58- मे लिखा है अिवादिही खबीरा(कबीरा)मतलब पूजा के योग्य कबीरा हैा... आयत 58:- व तवक्कल् अलल् हरिूल्लजी ला यमूतुव सब्बिह् बिहम्दिही वकफा बिही बिजुनूबि अिबादिही खबीरा(कबीरा)।58। और (ऐ पैग़म्बर ! ) उस जिन्दा (चैतन्य) परभरोसा रखो जो कभी मरनेवाला नहीं औरतारीफ़ के साथउसकी पाकी बयान करते रहो और अपनेबन्दों के गुनाहों से वह काफ़ी ख़बरदार है (58) आयत संख्या 58 का ऊपर अनुवादकिसी मुसलमान भक्त का किया हुआ हैजो वास्तविकता प्रकट करने में असमर्थ रहा है।वास्तव में इस आयत संख्या 58 का भावार्थ हैकि हजरत मुहम्मद जी जिसे अपना प्रभुमानते हैं वह कुरान ज्ञान दाता अल्लाह (प्रभु)किसी और पूर्ण प्रभु की तरफसंकेत कर रहा है कि ऐ पैगम्बर उसकबीर परमात्मा पर विश्वास रख जो तुझेजिंदा महात्मा के रूप में आकर मिला था। वहकभी मरने वाला नहीं हैअर्थात् वास्तव में अविनाशी है।तारीफ के साथउसकी पाकी(पवित्र महिमा)का गुणगान किए जा, वह कबीर अल्लाह(कविर्देव) पूजा के योग्य है तथा अपने उपासकों के सर्वपापों को विनाश करने वाला है। आयत 59:- अल्ल्जी खलकस्समावाति वल्अर्ज वमा बैनहुमा फी सित्तति अय्यामिन्सुम्मस्तवा अलल्अर्शि अर्रह्मानु फस्अल्बिही खबीरन्(कबीरन्)।59।। जिसने आसमानों और जमीन और जो कुछ उनकेबीच में है (सबको) छः दिन में पैदा किया, फिर तख्तपर जा विराजा (वह अल्लाह बड़ा) रहमान है,तो उसकी खबर किसी बाखबर (इल्मवाले)से पूछ देखो। (59) आयत संख्या 59 का ऊपर वाला अनुवादकिसी मुसलमान श्रद्धालु का किया हुआ हैजो पवित्र शास्त्र र्कुआन शरीफ के वास्तविकभावार्थ से कोसों दूर है। इसका वास्तविक भावार्थ हैकि हजरत मुहम्मद को र्कुआन शरीफबोलने वाला प्रभु (अल्लाह) कह रहा है कि वहकबीर प्रभु वही है जिसनेजमीन तथा आसमान के बीच मेंजो भी विद्यमान है सर्वसृष्टी की रचना छः दिन मेंकी तथा सातवें दिन ऊपर अपने सत्यलोक मेंसिंहासन पर विराजमान हो(बैठ) गया।उस पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति कैसेहोगी ? तथा वास्तविक ज्ञानतो किसी तत्वदर्शी संत(बाखबर) से पूछो,मैं (कुर्रान ज्ञान दाता) नहीं जानता।दोनों पवित्र धर्मों(ईसाई तथा मुसलमान) के पवित्र शास्त्रों नेभी मिल-जुल कर प्रमाणित कर दिया कि सर्वसृष्टी रचनहार सर्व पाप विनाशक, सर्वशक्तिमान, अविनाशी परमात्मा मानव सदृशशरीर में आकार में है तथा सत्यलोक मेंरहता है। उसका नाम कबीर है,उसी को अल्लाहु अकबिरूभी कहते हैं।